जंगल राज के बाद जब सत्ता पर काबिज हुए नीतीश कुमार, आखिर बिहार को दिया ही क्या? आइए जानते हैं
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि वो जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा जाएंगे. उन्होंने अपने बेटे निशांत कुमार की ताजपोशी की पूरी तैयारी कर ली है. लेकिन कई लोगों के जेहन में सवाल उठता है कि आखिर सुशासन बाबू के नाम से विख्यात नीतीश कुमार ने बिहार के लिए किया ही क्या है? खासकर राजद समर्थकों के बीच यह धारणा अक्सर सुनने को मिलती है कि बिहार के लिए सबसे ज्यादा काम लालू प्रसाद यादव ने ही किया है. हालांकि, यह भी सच है कि लालू प्रसाद यादव के शासनकाल को अक्सर ‘जंगलराज’ कहकर आलोचना की गई. उस दौर में अपहरण, हत्या और अपराध की घटनाएं देशभर में चर्चा का विषय बन गई थीं. हालात ऐसे बन गए थे कि शाम ढलते ही लोग घर से बाहर निकलने में डर महसूस करते थे. कई बड़े डॉक्टर, उद्योगपति और व्यापारी बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों में बसने की कोशिश में रहते थे. उस समय लालू प्रसाद यादव को यह विश्वास था कि नीतीश कुमार कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे.
लेकिन समय ने करवट ली और नीतीश कुमार न सिर्फ मुख्यमंत्री बने, बल्कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 21 वर्षों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में बने रहे. 19 साल से ज्यादा समय तक तो मुख्यमंत्री ही रहे. इस तरह न सिर्फ लालू प्रसाद यादव का दंभ टूटा, बल्कि नवंबर 2005 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए एक व्यापक और बहुआयामी रणनीति पर काम शुरू किया. उनकी प्राथमिकता सबसे पहले राज्य में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करना थी. इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने, सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता लाने और सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया. प्रशासनिक सुधारों के जरिए उन्होंने एक मजबूत नौकरशाही की नींव रखने की कोशिश की और सामाजिक न्याय के लिए दीर्घकालिक योजनाएं तैयार कीं. इन्हीं प्रयासों ने आने वाले वर्षों में बिहार में हुए विकास और सामाजिक बदलाव की बुनियाद तैयार की.

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